किस्मत बदलने वाली
जादुई मेरु रिंग

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ऐसा माना जाता है कि कछुआ सौभाग्य और समृद्धि लाता है। न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी कई संस्कृतियों में कछुए को सकारात्मकता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस विश्वास के साथ, यह निश्चित रूप से आपकी उंगली पर कछुए के आकार की मेरु अंगूठी पहनने के लिए सहायक होगा जो आपको हमेशा अच्छी स्थिति में रखेगा।
यह आकर्षक मेरु अँगूठी प्राचीन शास्त्रों और परंपरा के सिद्धांतों पर बनाई गई है और माना जाता है कि आपको अपनी प्रतिभा और मेहनत के अलावा सौभाग्य प्राप्त करने में मदद करता है।

(कैश ऑन डिलिवरी की सुविधा उपलप्ध)

नकारात्मक ऊर्जा
को करे दूर

मेरु रिंग या कछुआ अंगूठी भारतीय प्राचीन वास्तु शास्त्र तथा चाईनीज़ फेंग शुई पर आधारित है, ऐसी मान्यता है की इसे पहनने के बाद से आपके आस-पास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

लंबे जीवन तथा
संपन्ता से भरपूर

यह वास्तु शास्त्र और फेंग शुई में माना जाता है कि कछुआ लंबे जीवन का प्रतीक है क्योंकि इसे सभी जीवों मे सबसे लंबे जीवन का उपहार में दिया गया। हिंदु पौराणिक कथाओं में, भगवान विष्णु ने सागर मंथन के दौरान पृथ्वी को पालने के लिए कछुए का रूप लिया

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धन तथा
सम्र्द्धी का प्रतीक

फेंग शुई वास्तु के अनुसार इसमे 7 स्टोन मध्य मे तथा 14 स्टोन बाहरी रिंग मे लगे होते है जिनका योग 7 + 14 = 21 होता है 2+1 = 3 अंक आपके पास धन वर्षा के साथ साथ धन को खर्च होने से बचाता है। सबसे मुख्य बात यह की इसे किसी भी राशि के व्यक्ति पहन सकतें हैं।

विजय एवम
सफलता की प्राप्ति

भारतीय वास्तु के अनुसार कछुआ जीव को घर मे रखने से सफलता की प्राप्ति होती है क्यौकी कछुआ निरंतर चाल से चलता रहता है तथा कभी थकता नही है। जिससे आपको व्यापार मे लाभ तथा कार्यक्षेत्र मे सफलता मिलती है।

सुरक्षा तथा
परिवार कवच

फेंग शुई वास्तु के अनुसार कछुए मे वो सब खास बातें सम्मिलित हैं जो एक परिवार के सुरक्षा कवच मे होनी चाहिए, कछुए को हानी पहुंचाना बेहद मुश्किल है तथा जीवों मे सबसे लंबी आयु होती है। यह सभी तत्त्व इस अंगूठी के द्वारा आपको तथा परिवार को मिलते रहते हैं।

अंगूठी कैसे पहने ?

कछुए की अंगूठी पहनते समय हमेशा याद रखें कि कछुए का सिर हमेशा अंदर की ओर या इसे पहनने वाले व्यक्ति की ओर होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि उत्पन्न सकारात्मकता कछुए की अंगूठी के पहनने वाले को दिलाई जाएगी। अगर कछुए का चेहरा बाहर की ओर है, तो धन और समृद्धि आने के बजाय दूर चली जाएगी। कछुआ अंगूठी के लिए अनुकूल धातु पीली और सफ़ेद है, ये धातुएं दिव्य ऊर्जाओं को बरकरार रखने में मदद करती हैं। कछुए की अंगूठी पहनने से पहले, कच्चे दूध या कच दुध में भिगो दें और अंगूठी और सौभाग्य को बढ़ाने के लिए शुक्रवार को धारण करें। अंगूठी हमेशा दाहिने हाथ की मध्यमा या तर्जनी में पहननी चाहिए। शुक्रवार को कछुए की अंगूठी का इंतजार करने का सबसे अच्छा दिन है, क्योंकि कछुआ देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ है। पहनने के बाद कछुए की अंगूठी को घुमाया नहीं जाना चाहिए। क्योंकि जब आप कछुए की अंगूठी को घुमाते हैं तो कछुए का सिर भी अपनी दिशा बदल सकता है जिससे आपकी समृद्धि और धन आने में बाधाएं आ सकती हैं।

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